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❖ सुविचार :- “अपने ज्ञान को साझा करना, यह एक तरह से अमरत्व को प्राप्त करने जैसा है”- दलाई लामा

Sunday, 31 March 2024

#समय की कीमत

समय की कीमत
समय अनमोल है। जो समय का महत्व जानते हैं, वे पल-पल समय का सदुपयोग करते हैं। इससे संसार में किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। यह मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। परिश्रम से सफलता प्राप्त होती है, यह सत्य है, पर श्रम यदि समय पर न किया जाए, तो बेकार है। एक परिश्रमी किसान यदि समय पर बीज नहीं बोएगा, ' निश्चित समय पर खाद-पानी नहीं देगा, तो उससे फसल नहीं पकेगी। फसल को असमय काटने पर भी वह बर्बाद हो जाएगी। यानी समय पर किया गया कार्य ही सफलता दिलाता है।प्रकृति हमें समय पर काम करने की शिक्षा देती है। ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर, वसंत सभी ऋतुएं समय पर आती हैं और चली जाती हैं। समय पर सूर्योदय-सूर्यास्त होते हैं। समय पर पुष्प खिलते हैं। प्रकृति का क्रम यदि बिगड़ जाए, तो कठिनाइयां खंड़ी हो जाएंगी। महापुरुषों की सफलता का रहस्य इसी बात में है कि उन्होंने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण का उपयोग किया, उसे अमूल्य संपत्ति समझा। वे प्रत्येक क्षण पूरी निष्ठा, लगन और परिश्रम से अपने काम में जुटे रहे। बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। जिसने समय की बर्बादी की, उसने जीवन की बर्बादी कर दी। कौन-कितने दिन जिया, इससे किसी व्यक्ति का मापन नहीं होता। व्यक्ति के मूल्यांकन की कसौटी यह है कि उसने अपने समय का कितना सही उपयोग किया है।आलसी व्यक्ति अवसर की प्रतीक्षा करते हैं। इंतजार में ही जीवन बीता देते हैं। वे यह नहीं समझते कि जीवन का प्रत्येक क्षण स्वर्णिम अवसर लेकर चुपचाप आता और उपयोग न करने पर दबे पांव लौट जाता है। जब-तक किसी क्षण का उपयोग न किया जाए, तब तक कैसे कहा जा सकता है कि वह समय किसी काम के लिए उपयुक्त नहीं। हर व्यक्ति के जीवन में परिवर्तनकारी समय आता है, पर वह उसके आने की आहट नहीं सुन पाता। अतः बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति हर क्षण को अमूल्य समझकर उसे व्यर्थ न गंवाए।

Thursday, 28 March 2024

# दिनांक - 27/03/2024, पुस्तकोपहार - उत्सव

 

पुस्तकोपहार - उत्सव 
दिनांक 27/03/2024 को विद्यालय पुस्तकालय में पुस्त्कोपहार का आयोजन प्रभारी प्राचार्या श्री मति गायत्री कमान के दिशानिर्देशन में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ |  पुस्तक उपहार देना एक बहुत ही सुंदर और महत्वपूर्ण कार्य है। यह दूसरों को ज्ञान, संवेदनशीलता, और सोच की गहराई तक पहुंचने का माध्यम होता है। इससे न केवल उन्हें एक अच्छी किताब का आनंद मिलता है, बल्कि उनकी प्रतिभा और ज्ञान को बढ़ावा मिलता है।


Wednesday, 13 March 2024

# पुस्तकोपहार - उत्सव

 


*पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय पानीसागर 

~पुस्तकोपहार - उत्सव~

प्यारे बच्चों जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्रीय विद्यालय प्रति वर्ष नये सत्र की शुरुआत में पुस्तक उपहार उत्सव मनाता है। इस उत्सव में छात्र-छात्राएं पिछली कक्षा की किताबों को विद्यालय पुस्तकालय में जमा करते हैं और अगर अगली कक्षा की पुस्तक उपलब्ध हो तो पुस्तकें प्राप्त करते हैं। केन्द्रीय विद्यालय की पुस्तकोंपहार योजना निशुल्क है जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक पेड़ों को कटने से बचाना है, क्योंकि कागज पेड़ों से ही बनते हैं। एक पेड़ से 16.67 कागज के रीम बनते हैं और एक रीम में 500 sheets होते हैं, तो एक पेड़ से 16.67×500=8335 sheets कागज बनता हैं।यदि आप सब इस पुस्तक उपहार योजना/उत्सव में पुरानी कक्षा की पुस्तकों को दान करके और अगली कक्षा की पुस्तकें प्राप्त करके भाग लेते हैं, तो जाने-अनजाने में कितने पेड़ों को कटने से बचा सकते हैं। ज़रा सोचिए। 
प्यारे बच्चों केंद्रीय विद्यालय के इस पुस्तक उपहार उत्सव में आप बढ़ चढ़कर हिस्सा ले औऱ सैंकड़ों पेड़ों को कटने से बचायें। आप अपनी पिछली कक्षा की पुस्तकें 27 *मार्च *2024 तक विद्यालय पुस्तकालय में या अपने कक्षा अध्यापक को जमा करवा सकते हैं।     
           धन्यवाद


Wednesday, 28 February 2024

#National Science Day

Celebrating Curiosity and Innovation!
Today, we honor the legacy of Sir C.V. Raman, whose groundbreaking work on the scattering of light won him the Nobel Prize in Physics and led to the discovery of the Raman Effect.

Greetings of #NationalScienceDay2024! 🔬

#KVS #KVians

Sunday, 28 January 2024

# प्रकृति का नियम

*हर कोई अपने जीवन में कभी न कभी विकट परिस्थितियों से गुजरता है। ऐसी स्थिति में कुछ व्यक्ति बहुत जल्द ही निराश होने लगते हैं। कुछ व्यक्ति इसे ईश्वर की मर्जी मान लेते हैं। वैसे इंसान जो धैर्य खो देते हैं, उन्हें संकटों का सामना करने में मुश्किल होती है। फिर वे ईश्वर से सवाल करने लगते हैं कि यह जिंदगी ही क्यों दी और जिंदगी दी तो जिंदगी में इतने दुख क्यों दिए। दुख दिए तो दुख का निवारण क्यों नहीं हो रहा है?हमें यह ध्यान रखने की आवश्यकता है कि अगर इस प्रकृति ने हमें जन्म दिया तो हम सभी इस प्रकृति की संतान हैं। इस प्रकृति को सबका ध्यान है। उसको सबका स्वभाव पता है। उसको सबकी क्षमता पता है। उसे यह भी पता है कि किसी को अस्तित्व में बनाए रखने के लिए उसके जीवन में कितना संघर्ष लाना आवश्यक है। अन्यथा व्यक्तिगत स्वभाव या प्रकृति के अनुसार अस्तित्व में बने रहने के लिए उसमें जरूरी क्षमता विकसित नहीं हो पाएगी। ठीक वैसे ही जैसे एक तितली इस दुनिया में आती है। अगर उस तितली के लिए चुनौतीपूर्ण क्षण किसी भी वजह से आसान हो जाए तो वह क्षण उसके लिए बेहतर है, लेकिन उसके बाद की चुनौती वह सह नहीं पाती है। चुनौतियां हमें भविष्य के लिए तैयार करती हैं।ओशो कहते हैं, कि 'अगर बहुत सुरक्षा मिले और कोई संघर्ष न हो तो रीढ़ टूट जाती है। रीढ़ - बनती ही संघर्ष में है। तुम जितना संघर्ष करते हो, उतनी ही तुम्हारी रीढ़ मजबूत होती है।' इसलिए हमें प्रकृति के नियम पर भरोसा रखना होगा। हमें ईश्वर पर भरोसा रखना होगा। वह बस यही चाहते हैं कि हमारा जन्म जिस उद्देश्य के लिए हुआ है हम उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएं। हमेशा यह याद रखिए कि जिसके जीवन में अभूतपूर्व संघर्ष आया है, वही अभूतपूर्व सफलता के योग्य बन सकता है। वह उन करोड़ों लोगों से अलग है, जिसने उनकी तुलना में अपेक्षाकृत आसान एवं सुगम जीवन जिया है।*

Saturday, 27 January 2024

#वास्तविक संपदा

*सभी सुविधाओं युक्त भव्य मकान, शानदार वाहन, ऊंची आय, घर-बाहर के लिए सेवादार जैसी चलायमान वस्तुएं व्यक्ति की वास्तविक संपदा नहीं हो सकतीं। अनेक व्यक्ति इन्हें परम लक्ष्य मान कर आजीवन भ्रम और अंततः दुख में जीते हैं। बेचारे नहीं जानते, कालांतर में ये वस्तुएं क्षत- विक्षत हो सकती हैं। धर्म स्थलों के बाहर कटोरा थामे बैठे व्यक्तियों में उन नामी लोगों की संतानें भी हैं जिन्होंने बाह्य उपलब्धियों को सर्वस्व मान कर असल संपदा की अनदेखी की।स्वामी विवेकानंद ने कहा, समस्त परिसंपत्तियां, प्रशस्तियां, अलंकरण आदि छिन जाने पर भी व्यक्ति के पास जो बचा रहता है यानी उसका हौसला, वही मनुष्य की असल संपदा है। हाड़- मांस के आवरण में ढका उसका अमूर्त दैविक स्वरूप ही उसके जीवन को अर्थ देता है। इस संपदा में हमें सुमार्ग पर प्रशस्त रहने में सहभागी भी सम्मिलित हैं। ऐसे व्यक्ति में सतत् जीवंतता और आशा का संचार रहता है जिसके चलते वह चाहे तो समस्त खोया हुआ पुनः प्राप्त कर लेता है। लौकिक लक्ष्यों से अभिप्रेरित होंगे तो जीवन के अहम मूल्य उपेक्षित रह जाएंगे। लौकिक समृद्धि और शक्ति का अप्रिय पक्ष यह है कि इनके किरदारों में अहंकार आ जाता है। वह आत्मीय जनों सहित उन्हें भी कमतर आंकता है जिनकी सदाशयताएं सिद्ध रहीं। अपने पास क्या, कितना है, इसे जानने के स्थान पर लौकिक सुख-समृद्धि के उपासक का ध्यान इसी पर रहता है कि दूसरों के पास क्या-क्या है, जो स्वयं के पास नहीं है। यही चिंता उसे सताती है और उसके दुख का कारण बनती है।झड़ गए पत्तों को देख कर एकबारगी हरे-भरे वृक्ष का महत्व समझ आए या माता-पिता, परिजन के न रहने के पश्चात उनकी अतुल्य भूमिका का अहसास होना दूरदर्शिता नहीं है। जीवन की सार्थकता तब है जब हम स्वयं की सामर्थ्य, आज उपलब्ध साधनों-संबंधों को असल संपदा समझते हुए इनके प्रति कृतज्ञता का भाव संजोए रखें।*

Thursday, 25 January 2024

#आज की कहानी

सच्चा ज्ञान

*एक संन्यासी ईश्वर की खोज में निकला और एक आश्रम में जाकर ठहरा।पंद्रह दिन तक उस आश्रम में रहा, फिर ऊब गया। उस आश्रम के जो बुढे गुरु थे वह कुछ थोड़ी सी बातें जानते थे,रोज उन्हीं को दोहरा देते थे।फिर उस युवा संन्यासी ने सोचा,'यह गुरु मेरे योग्य नहीं, मैं कहीं और जाऊं। यहां तो थोड़ी सी बातें हैं, उन्हीं का दोहराना है।कल सुबह छोड़ दूंगा इस आश्रम को, यह जगह मेरे लायक नहीं।'लेकिन उसी रात एक ऐसी घटना घट गई कि फिर उस युवा संन्यासी ने जीवन भर वह आश्रम नहीं छोड़ा। क्या हो गया?दरअसल रात एक और संन्यासी मेहमान हुआ।रात आश्रम के सारे मित्र इकट्ठे हुए, सारे संन्यासी इकट्ठे हुए, उस नये संन्यासी से बातचीत करने और उसकी बातें सुनने।उस नये संन्यासी ने बड़ी ज्ञान की बातें कहीं, उपनिषद की बातें कहीं, वेदों की बातें कहीं।वह इतना जानता था, इतना सूक्ष्म उसका विश्लेषण था, ऐसा गहरा उसका ज्ञान था कि दो घंटे तक वह बोलता रहा। सबने मंत्रमुग्ध होकर सुना।उस युवा संन्यासी के मन में हुआ,'गुरु हो तो ऐसा हो। इससे कुछ सीखने को मिल सकता है। एक वह गुरु है, वह चुपचाप बैठे हैं, उन्हे कुछ भी पता नहीं।अभी सुन कर उस बूढ़े के मन में बड़ा दुख होता होगा, पश्चात्ताप होता होगा, ग्लानि होती होगी—कि मैंने कुछ न जाना और यह अजनबी संन्यासी बहुत कुछ जानता है।'युवा संन्यासी ने यह सोचा कि'आज वह बूढ़ा गुरु अपने दिल में बहुत—बहुत दुखी, हीन अनुभव करता होगा।'तभी उस आए हुए संन्यासी ने बात बंद की और बूढ़े गुरु से पूछा कि- "आपको मेरी बातें कैसी लगीं?"बूढे गुरु खिलखिला कर हंसने लगे और बोले-"तुम्हारी बातें? मैं दो घंटे से सुनने की कोशिश कर रहा हूँ तुम तो कुछ बोलते ही नहीं हो। तुम तो बिलकुल भी बोलते ही नहीं हो।"वह संन्यासी बोला-"मै दो घंटे से मैं बोल रहा हूं आप पागल तो नहीं हैं! और मुझसे कहते हैं कि मैं बोलता नहीं हूँ।"वृद्ध ने कहा- "हां, तुम्हारे भीतर से गीता बोलती है, उपनिषद बोलता है, वेद बोलता है, लेकिन तुम तो जरा भी नहीं बोलते हो। तुमने इतनी देर में एक शब्द भी नहीं बोला!एक शब्द तुम नहीं बोले, सब सीखा हुआ बोले, सब याद किया हुआ बोले, जाना हुआ एक शब्द तुमने नहीं बोला।इसलिए मैं कहता हूं कि तुम कुछ भी नहीं बोलते हो, तुम्हारे भीतर से किताबें बोलती हैं।'वास्तव में एक ज्ञान वह है जो उधार है, जो हम सीख लेते हैं। ऐसे ज्ञान से जीवन के सत्य को कभी नहीं जाना जा सकता।जीवन के सत्य को केवल वे जानते हैं जो उधार ज्ञान से मुक्त होते हैं।हम सब उधार ज्ञान से भरे हुए हैं।हमें लगता है कि हमें ईश्वर के संबंध में पता है। पर भला ईश्वर के संबंध में हमें क्या पता होगा जब अपने संबंध में ही पता नहीं है? हमें मोक्ष के संबंध में पता है। हमें जीवन के सभी सत्यों के संबंध में पता है। और इस छोटे से सत्य के संबंध में पता नहीं है जो हम हैं!अपने ही संबंध में जिन्हें पता नहीं है, उनके ज्ञान का क्या मूल्य हो सकता है?लेकिन हम ऐसा ही ज्ञान इकट्ठा किए हुए हैं। और इसी ज्ञान को ज्ञान समझ कर जी लेते हैं और नष्ट हो जाते हैं।आदमी अज्ञान में पैदा होता है और मिथ्या ज्ञान में मर जाता है, ज्ञान उपलब्ध ही नहीं हो पाता।दुनिया में दो तरह के लोग हैं,एक अज्ञानी और एक ऐसे अज्ञानी जिन्हें ज्ञानी होने का भ्रम है। तीसरी तरह का आदमी मुश्किल से कभी-कभी जन्मता है। लेकिन जब तक कोई तीसरी तरह का आदमी न बन जाए, तब तक उसकी जिंदगी में न सुख हो सकता है, न शांति हो सकती है।अतः अपनें भीतर की आभा से अवगत होनें हेतु एक मात्र आवलम्बन है, सद्गुरु की शरण में विह्वल प्रार्थना...

Tuesday, 23 January 2024

#पराक्रम दिवस

आज विध्यालय परिसर में पराक्रम दिवस के उपलक्ष्य में चित्रकारी प्रतियोगिता (ART Competition ) का आयोजन किया गया जो की प्राचार्या श्री मति गायत्री के दिशानिर्देसन में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ  । 

Saturday, 13 January 2024

#आज की कहानी

आइंस्टीन के जो ड्राइवर थे, उन्होंने एक दिन आइंस्टीन से कहा- " सर,आप हर सभा में जो भाषण देते हैं, वह मैंने याद कर लिया है।'' 

-आइंस्टीन हैरान रह गये!

       फिर उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं अगली बैठक में जहां जा रहा हूं, वे मुझे नहीं जानते, आप मेरे स्थान पर भाषण दीजिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।"

 - ऐसे ही हुआ अगले दिन बैठक में ड्राइवर मंच पर चढ़ गई और ड्राइवर ने हूबहू आइंस्टीन की भाषण देने लगा....

    दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं.  फिर वे यह सोचकर गाड़ी के पास आए कि ड्राइवर आइंस्टीन है।

 - तभी एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा, ''सर, रिश्तेदार ने क्या कहा, क्या आप एक बार फिर संक्षेप में बताएंगे?''

 - असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!

    इस बार ड्राइवर पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वह हैरान रह गये....

     ड्राइवर ने उत्तर दिया.  -"क्या यह साधारण बात आपके दिमाग में नहीं आई? 

 मेरे ड्राइवर से पूछिए वह आपको समझाएंगे "

 नोट :  "यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी...!!
#AlbertEinstein

Thursday, 14 December 2023

# KVS Foundation Day 2023

Kendriya Vidyalaya Sangathan celebrates its foundation day on the 15th of December every year. Kendriya Vidyalaya Sangathan was established in the year 1963 with only 20 regimental schools


Its headquarters is in saheed Jeet singh marg, New Delhi 110 016. Kendriya vidyalaya sangathan is abbreviated as KVS. It is functioning under the ministry of MoE (Ministry of Education) erstwhile Ministry of Human resource center.
All the Kendriya Vidyalayas are affiliated under CBSE : Central Board of Secondary Education, Delhi.

History of KVS

The Kendriya Vidyalayas was approved in November 1962 by
the Govt. of India in NOV 1962 on the recommendations
of the 2nd CPC (Central Pay Commission). Wherein it was clearly mentioned to set up an institution to the wards of transferable Central
Government employees and to provide uninterrupted schooling during the academic session.
In view of the recommendation 20 regimental schools were opened during the academic year 1963-64. Initially it was established in the area where huge numbers of defence employees were deployed.
KVS was registered as a society under the Societies Registration Act (XXI of 1860) on 15th December 1965.

Objective of Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS)

The primary aim of the Sangathan is as follows:

  1. To provide, establish, endow, maintain, control and manage the Central
    Schools (Kendriya Vidyalayas) located all over India and abroad.

Due to its quality education and popularity the number of Kendriya Vidyalayas are increased from 20 to 1256 till November 2023. Apart from that KVS has also set up ZIETs for the continuous training of their teachers and staffers.Here, ZIETs abbreviated as Zonal Institute of Education and Training. Five ZIETs are as follows:

1 ZIET Mysore

2 ZIET Chandigarh

3. ZIET Bhubaneswar

4. ZIET Mumbai

5. ZIET Gwalior

Tuesday, 12 December 2023

#PARIKSHA PE CHARCHA - 2024

Welcome to Pariksha Pe Charcha Contest 2024
It's time to leave exam stress behind and get inspired to do your best!

The interaction every student in India is waiting for is here - Pariksha Pe Charcha with Hon’ble Prime Minister Narendra Modi!

Prime Minister Narendra Modi will also interact with parents & teachers, to help & enable them to support students to accomplish all their dreams & goals.

So, how do you (a student, parent or teacher) get a chance to participate in the seventh edition of Pariksha Pe Charcha? It’s very simple.

First things first, click on the ‘Participate Now’ button.
Remember, the competition is open for school students of classes 6 to 12.
Students may also submit their question to the Hon'ble Prime Minister in a maximum of 500 characters.
Parents and teachers can also participate and submit their entries in the online activities designed exclusively for them.

#समय की कीमत

समय की कीमत समय अनमोल है। जो समय का महत्व जानते हैं, वे पल-पल समय का सदुपयोग करते हैं। इससे संसार में किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। यह ...